नालंदा में 90 हजार रुपये रिश्वत लेते दारोगा गिरफ्तार, DSP को 50 हजार देने की बात का भी आरोप
निगरानी विभाग की कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप, आर्म्स एक्ट के मामले में मदद के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप
नालंदा, बिहार। बिहार के नालंदा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजगीर थाना में तैनात पुलिस अवर निरीक्षक (SI) देवकांत कुमार को कथित तौर पर 90 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। निगरानी टीम ने आरोपी दारोगा को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला आर्म्स एक्ट से जुड़े एक मुकदमे में मदद करने से संबंधित बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि केस में मदद करने और केस डायरी में राहत दिलाने के नाम पर दारोगा द्वारा पैसे की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की जांच की और इसके बाद ट्रैप की कार्रवाई की।
90 हजार रुपये पर तय हुई कथित डील
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उससे रकम की मांग की गई थी। बाद में कथित तौर पर 90 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। पैसे देने के लिए दारोगा को गिरियक मार्ग के पास बुलाया गया। जैसे ही कथित रूप से रिश्वत की रकम दी गई, पहले से मौजूद निगरानी विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए दारोगा को पकड़ लिया।
DSP को 50 हजार देने की बात का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया कि शिकायतकर्ता के अनुसार दारोगा ने कथित तौर पर कहा था कि 50 हजार रुपये DSP को देने हैं और बाकी 40 हजार रुपये वह खुद रखेंगे। हालांकि, यह आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित है और इसकी पुष्टि संबंधित जांच एवं कानूनी प्रक्रिया से होनी है। किसी अन्य अधिकारी की संलिप्तता को केवल इस आरोप के आधार पर तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
लाइसेंसी रिवॉल्वर भी जब्त
कार्रवाई के दौरान निगरानी टीम ने आरोपी दारोगा की लाइसेंसी रिवॉल्वर भी जब्त की। गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग आरोपी को अपने साथ पटना ले गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया और निगरानी अदालत में पेशी की बात रिपोर्ट में कही गई है।
रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई
बिहार में सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग लगातार ट्रैप कार्रवाई करता रहा है। नालंदा की यह कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा बताई गई है। पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारी के खिलाफ हुई कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, इस मामले में अंतिम स्थिति अदालत की कार्यवाही और जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी। आरोपी पर लगे आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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