Ukraine Nuclear Plant Crisis: एक हफ्ते से बिजली गुल, सिर्फ 10 दिन का डीजल! Zaporizhzhia पर बढ़ा परमाणु सुरक्षा का खतरा



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Zaporizhzhia Nuclear Power Plant में बढ़ी चिंता, छह बंद रिएक्टरों की कूलिंग के लिए इमरजेंसी डीजल जनरेटर पर निर्भरता; IAEA ने जताई गंभीर चिंता

कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप के सबसे बड़े परमाणु बिजली संयंत्र Zaporizhzhia Nuclear Power Plant को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के मुताबिक प्लांट एक सप्ताह से ज्यादा समय से बाहरी बिजली आपूर्ति से कटा हुआ है और फिलहाल जरूरी सुरक्षा प्रणालियों को चलाने के लिए आपातकालीन डीजल जनरेटरों पर निर्भर है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्लांट के पास उपलब्ध डीजल भंडार लगभग 10 दिनों तक ही जनरेटर चलाने के लिए पर्याप्त बताया गया है। IAEA प्रमुख Rafael Grossi ने साफ किया है कि ऐसी स्थिति में भरोसेमंद बाहरी बिजली और सुरक्षित ईंधन आपूर्ति बेहद जरूरी है।

20 अगस्त से बाहरी बिजली आपूर्ति बंद

IAEA के अनुसार Zaporizhzhia प्लांट का आखिरी बचा बाहरी बिजली कनेक्शन 330 kV Ferosplavna-1 लाइन 20 अगस्त को सैन्य गतिविधियों के बाद टूट गया था।

इसके बाद प्लांट को अपने जरूरी सिस्टम चलाने के लिए आपातकालीन डीजल जनरेटरों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। ये जनरेटर उन पंपों को बिजली उपलब्ध करा रहे हैं, जो प्लांट के छह बंद रिएक्टरों और इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन के पूल को ठंडा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यही वजह है कि बाहरी बिजली की लंबे समय तक अनुपलब्धता को परमाणु सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

छहों रिएक्टर बंद, फिर भी बिजली की जरूरत

यह समझना जरूरी है कि Zaporizhzhia प्लांट के सभी छह रिएक्टर फिलहाल बिजली उत्पादन नहीं कर रहे हैं। वे 2022 से बंद स्थिति में हैं।

इसके बावजूद रिएक्टरों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके भीतर मौजूद परमाणु ईंधन को सुरक्षित तापमान पर रखने के लिए लगातार कूलिंग और दूसरे सुरक्षा सिस्टम चलाने पड़ते हैं।

यही काम करने के लिए बिजली जरूरी है। अगर बाहरी बिजली लंबे समय तक उपलब्ध नहीं रहती, तो प्लांट को बैकअप जनरेटरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

10 दिन का डीजल बना सबसे बड़ा सवाल

मौजूदा संकट में सबसे बड़ी चिंता डीजल को लेकर है।

IAEA को जानकारी दी गई है कि प्लांट में मौजूद डीजल भंडार करीब 10 दिनों तक की जरूरत पूरी कर सकता है। एजेंसी ने यह भी बताया कि हाल में आसपास के दो स्थानों से कई दर्जन टन डीजल प्लांट तक पहुंचाया गया है।

लेकिन युद्ध क्षेत्र में ईंधन की लगातार और सुरक्षित सप्लाई अपने आप में बड़ी चुनौती है।

IAEA के मुताबिक प्लांट के बाहरी ईंधन भंडारण केंद्र में आखिरी बड़ी डिलीवरी करीब छह महीने पहले मार्च में हुई थी। मई में प्रस्तावित अगली डिलीवरी क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण टल गई थी।

IAEA कर रहा स्थानीय युद्धविराम की कोशिश

मौजूदा स्थिति को देखते हुए IAEA अब स्थानीय स्तर पर सीमित युद्धविराम कराने की कोशिश कर रहा है, ताकि क्षतिग्रस्त बिजली लाइन तक मरम्मत दल पहुंच सके और बाहरी बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके।

एजेंसी का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि परमाणु संयंत्र की सुरक्षा के लिए जरूरी तकनीकी काम को सुरक्षित माहौल में पूरा कराना है।

IAEA प्रमुख Rafael Grossi ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि परमाणु संयंत्र को सुरक्षित रखने के लिए विश्वसनीय बाहरी बिजली और सुरक्षित सप्लाई रूट जरूरी हैं।

ड्रोन घटनाओं ने भी बढ़ाई चिंता

बिजली संकट के बीच प्लांट के आसपास ड्रोन से जुड़ी घटनाओं ने भी सुरक्षा चिंता बढ़ाई है।

IAEA के अनुसार इस सप्ताह प्लांट में ड्रोन से जुड़े तीन घटनाक्रम हुए, जिनमें दो कर्मचारी घायल हुए। हालांकि एजेंसी ने इन घटनाओं के लिए किसी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। रूस और यूक्रेन एक-दूसरे पर प्लांट के आसपास हमलों के आरोप लगाते रहे हैं।

ऐसे माहौल में परमाणु संयंत्र के आसपास किसी भी सैन्य गतिविधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

क्या Nuclear Blast या Radiation Leak का खतरा है?

यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा लोगों के मन में है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी रेडिएशन लीक या परमाणु विस्फोट की पुष्टि नहीं हुई है। छहों रिएक्टर बंद हैं और जरूरी कूलिंग सिस्टम डीजल जनरेटरों के जरिए चलाए जा रहे हैं।

लेकिन अगर बाहरी बिजली लंबे समय तक बहाल नहीं होती और डीजल की आपूर्ति भी बाधित होती है, तो सुरक्षा प्रणालियों को लगातार चलाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसी संभावित जोखिम को देखते हुए IAEA स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

यूरोप के सबसे बड़े Nuclear Plant पर पूरी दुनिया की नजर

Zaporizhzhia Nuclear Power Plant यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु बिजली संयंत्र है। रूस ने मार्च 2022 में इस संयंत्र पर नियंत्रण हासिल किया था और तभी से यह युद्ध के सबसे संवेदनशील स्थानों में शामिल रहा है।

IAEA की टीम सितंबर 2022 से प्लांट में मौजूद है और परमाणु सुरक्षा की स्थिति पर नजर रख रही है।

बार-बार बिजली कटना इस प्लांट की सुरक्षा के लिए नई चुनौती नहीं है। लेकिन इस बार बाहरी बिजली की अनुपलब्धता एक सप्ताह से ज्यादा लंबी हो गई है और डीजल भंडार को लेकर सामने आई 10 दिन की सीमा ने चिंता को और बढ़ा दिया है।

अब क्या होगा?

मौजूदा समय में सबसे महत्वपूर्ण तीन चीजें हैं—

पहली, बाहरी बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल हो।
दूसरी, जब तक बिजली वापस नहीं आती, डीजल की सुरक्षित और लगातार सप्लाई बनी रहे।
तीसरी, प्लांट के आसपास सैन्य गतिविधियों को रोककर मरम्मत और सुरक्षा टीमों को काम करने का सुरक्षित रास्ता मिले।

अगर बिजली लाइन की मरम्मत हो जाती है या पर्याप्त अतिरिक्त डीजल पहुंच जाता है, तो मौजूदा दबाव काफी कम हो सकता है।

PC NEWS का निष्कर्ष

Ukraine का Zaporizhzhia Nuclear Power Plant इस समय एक बेहद संवेदनशील स्थिति से गुजर रहा है। एक सप्ताह से अधिक समय से बाहरी बिजली बंद है और जरूरी सिस्टम आपातकालीन डीजल जनरेटरों के सहारे चल रहे हैं। प्लांट में मौजूद डीजल करीब 10 दिनों तक चलने का अनुमान है।

फिलहाल किसी परमाणु दुर्घटना या रेडिएशन लीक की खबर नहीं है, लेकिन लंबे समय तक बिजली और ईंधन की कमी बनी रही तो परमाणु सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है।

अब पूरी दुनिया की नजर IAEA की कोशिशों, बिजली लाइन की मरम्मत और डीजल की अगली सप्लाई पर टिकी है।

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