लखनऊ में 228 किलो नशीली दवाओं का बड़ा नेटवर्क बेनकाब! 6 गिरफ्तार, कन्हैया फार्मा सील



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लखनऊ में नशीली दवाओं के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार! करीब ₹1 करोड़ की खेप बरामद, 6 आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ। राजधानी में नशीली और मनोदैहिक दवाओं की अवैध तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में एंटी-नारकोटिक्स टीम को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है, जो कथित तौर पर प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई में सक्रिय था। कार्रवाई के दौरान करीब ₹1 करोड़ कीमत की नशीली दवाएं बरामद की गई हैं। मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

कार्रवाई से मचा हड़कंप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, बरामद खेप में कोडीन आधारित कफ सिरप, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी मनोदैहिक दवाएं शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन दवाओं की सप्लाई सामान्य मेडिकल इस्तेमाल के बजाय कथित तौर पर अवैध तरीके से किए जाने की आशंका है। टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद दवाओं की सप्लाई कहां से हुई और इन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

छह लोगों पर कसा शिकंजा

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों की पूछताछ में कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सप्लायर और खरीदारों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था।

लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में करीब ₹1 करोड़ की नशीली/मनोदैहिक दवाओं की बरामदगी वाले मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों के नाम हैं:

  1. किशन वासवानी (Kishan Vaswani)
  2. समीर अहमद (Sameer Ahmed)
  3. शाद इरशाद (Shad Irshad)
  4. उमेश कुमार (Umesh Kumar)
  5. सतेंद्र सिंह (Satendra Singh)
  6. विशाल चौरसिया (Vishal Chaurasia)

रिपोर्ट के अनुसार बरामदगी में 9.60 लाख Alprazolam टैबलेट, 1.20 लाख Tramadol कैप्सूल और 720 बोतल Codeine युक्त Onerex कफ सिरप शामिल हैं। मामला NDPS Act की धाराओं 8, 21, 22 और 29 के तहत दर्ज किया गया है।

डिलीवरी से पहले पकड़ी गई खेप

ANTF को सूचना मिली थी कि ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में नशीली दवाओं की एक बड़ी खेप पहुंचने वाली है। जांच एजेंसी के अनुसार 3 सितंबर को निगरानी के दौरान मकान संख्या S-363/364 के सामने कुछ लोगों को कार्टन बोरियों में छिपाते देखा गया। तलाशी के दौरान किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के कब्जे से दवाएं बरामद होने की बात सामने आई।

दवाओं की आड़ में नशे का कारोबार?

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कानूनी तौर पर मेडिकल इस्तेमाल में आने वाली कुछ दवाओं का कथित तौर पर नशे के लिए दुरुपयोग किया जा रहा था। ऐसी दवाओं की अवैध बिक्री और सप्लाई युवाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अवैध सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए आगे भी अभियान जारी रहेगा।

पूछताछ के बाद सप्लाई चेन की कड़ियां खुलीं

जांच एजेंसी के मुताबिक पूछताछ में किशन वासवानी और समीर अहमद ने दवाओं की सप्लाई कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से मिलने की जानकारी दी। इसके बाद टीम ने उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार किया।

जांच में आरोप लगाया गया कि उमेश कुमार कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था और इसके बदले सतेन्द्र को कमीशन दिया जाता था। FSDA की जांच में कन्हैया फार्मा में अन्य दवाओं का स्टॉक भी मिला। खरीद-बिक्री से जुड़े पूरे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद फर्म को सील किए जाने की जानकारी सामने आई है।

NDPS Act के तहत मुकदमा

छहों आरोपियों के खिलाफ लखनऊ कमिश्नरेट के सरोजनी नगर थाने में NDPS Act की धारा 8, 21, 22 और 29 के तहत कार्रवाई की गई है। बरामद दवाओं के नमूने नियमानुसार न्यायालय के समक्ष लिए जाने की प्रक्रिया बताई गई है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से किए जाने की जानकारी भी दी गई है।

छठे आरोपी तक ऐसे पहुंची जांच

शाद इरशाद से पूछताछ के दौरान विशाल चौरसिया का नाम सामने आने के बाद उसे भी गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक विशाल ने शाद को नशीली दवाओं की सप्लाई करने की बात बताई।

जांच में यह भी सामने आया कि विशाल का दवा लाइसेंस पहले एक कोडीन संबंधी मामले के बाद निरस्त किया जा चुका था। एजेंसी के अनुसार इसके बाद भी दूसरी फर्मों के माध्यम से कथित रूप से दवाओं के कारोबार की जानकारी सामने आई है। कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई के स्रोत को लेकर भी जांच जारी है।

नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश

छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि इस पूरे मामले में मुख्य सप्लायर कौन है, दवाएं कहां से खरीदी गईं और किन इलाकों में इनकी सप्लाई की जा रही थी।

फिलहाल बरामद दवाओं को कब्जे में लेकर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

PC NEWS की नजर

228 किलो की बरामदगी और छह गिरफ्तारियां इस कार्रवाई को गंभीर बनाती हैं। अब असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में मनोदैहिक दवाएं सप्लाई चेन में कैसे पहुंचीं और इनके पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क की और कड़ियां सामने आने की संभावना है।

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