असम में बाढ़ की मार! पानी घटा तो सामने आई तबाही, हजारों परिवारों के सामने पुनर्वास की चुनौती



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असम में बाढ़ का कहर! तबाही के बाद भी मुश्किलें बरकरार, हजारों परिवारों के सामने पुनर्वास की चुनौती

गुवाहाटी। असम में इस साल आई भीषण बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। लगातार बारिश, उफनती नदियों और जलस्तर बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का रुख करना पड़ा। बाढ़ का पानी कई इलाकों में घरों, खेतों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा चुका है। हालांकि हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में पानी कम होने के संकेत मिले हैं, लेकिन बाढ़ से प्रभावित परिवारों के सामने अब घर, रोजगार और आजीविका दोबारा खड़ी करने की बड़ी चुनौती है।

भारी बारिश और उफनती नदियों ने बढ़ाई परेशानी

असम में मानसून के दौरान लगातार हुई भारी बारिश ने पहले से ही बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में स्थिति को गंभीर बना दिया। ब्रह्मपुत्र समेत कई सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल गया। कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ और ग्रामीण इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह बाधित रहा।

आकाशवाणी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मपुत्र और उसकी कई सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के करीब बह रही थीं। रांगानदी, धानसिरी, दिखौ और बुरहीदिहिंग जैसी नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

जान-माल का हुआ भारी नुकसान

इस साल की बाढ़ ने असम में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है। अगस्त के मध्य तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 105 लोगों की मौत हो चुकी थी और हजारों लोग अभी भी प्रभावित थे। कई जिलों में गांवों, कृषि भूमि और स्थानीय बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

बाढ़ के दौरान कई परिवारों ने अपने घर और घरेलू सामान खो दिए। खेती पर निर्भर परिवारों के सामने फसल और पशुधन के नुकसान के कारण आर्थिक संकट भी गहरा गया है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी प्रभावित लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं, क्योंकि कई परिवारों को अपने क्षतिग्रस्त घरों और रोजी-रोटी को फिर से खड़ा करना है।

राहत और बचाव अभियान जारी

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन दल और अन्य एजेंसियों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ राहत सामग्री, भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने की कोशिश की गई।

इससे पहले गंभीर बाढ़ के दौरान भारतीय सेना ने भी बचाव और राहत कार्यों में हिस्सा लिया था। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नावों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।

बाढ़ का पानी घटा, लेकिन चुनौतियां बाकी

प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ की स्थिति में सुधार की बात सामने आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रभावित परिवारों की परेशानियां समाप्त हो गई हैं। कई जगहों पर लोगों को क्षतिग्रस्त मकानों, खराब सड़कों, बिजली-पानी की समस्याओं और खेती के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और उनकी आजीविका को दोबारा पटरी पर लाना है। जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें आर्थिक सहायता की जरूरत है। वहीं जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके लिए घरों की मरम्मत और पुनर्निर्माण भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

केंद्र से मदद और पुनर्वास पर चर्चा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 21 अगस्त को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान और राहत-पुनर्वास की स्थिति पर चर्चा की। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और लोगों की आजीविका बहाल करने से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई। केंद्र की ओर से असम को आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया गया।

राज्य सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार हजारों परिवारों को अंतरिम राहत के तौर पर सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि भेजी गई है।

विशेषज्ञों ने दी दीर्घकालिक तैयारी की सलाह

असम में हर साल आने वाली बाढ़ को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राहत और बचाव अभियान पर्याप्त नहीं हैं। बाढ़ की पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने, प्राकृतिक जलमार्गों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण, वैज्ञानिक तरीके से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और बेहतर आपदा प्रबंधन पर लंबे समय तक काम करने की जरूरत है।

बाढ़ के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण समुदायों को भी बेहतर तैयारी के साथ जोड़ना जरूरी माना जा रहा है। समय पर चेतावनी मिलने और सुरक्षित स्थानों तक लोगों की तत्काल निकासी से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अब पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती

असम की बाढ़ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि हर साल आने वाली प्राकृतिक आपदा से स्थायी रूप से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएं। फिलहाल सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें सामान्य जीवन में वापस लाना है।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद असली परीक्षा पुनर्वास की होगी। लोगों के घर दोबारा बसाना, किसानों को नुकसान से उबारना, सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बहाल करना तथा प्रभावित परिवारों की आय के साधनों को मजबूत करना आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण कार्य होंगे।

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