दुबई-भारत गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क का खुलासा: तस्करों के नए तरीकों ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती



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दुबई से भारत तक सोने की तस्करी का जाल, जांच में खुल रहे नेटवर्क के बड़े राज

लखनऊ। दुबई से भारत तक फैले कथित गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की हालिया कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एक संगठित तंत्र की ओर संकेत किया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसियों को ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क केवल एक शहर या एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ हो सकता है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस नेटवर्क में विदेशी हैंडलर, स्थानीय संपर्क, कैरियर (Courier) और सोने की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े कई स्तरों पर काम करने वाले लोग शामिल होने की आशंका है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

जांच में सामने आया है कि तस्करी के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय अत्याधुनिक और बेहद गोपनीय तरीके अपनाए जा रहे थे। कथित तौर पर दुबई से आने वाले कुछ यात्रियों को आर्थिक लालच देकर कैरियर बनाया जाता था। उन्हें मुफ्त हवाई टिकट, नकद भुगतान या मोटे कमीशन का लालच दिया जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ मामलों में सोने को पाउडर या पेस्ट के रूप में छिपाकर शरीर के भीतर या अन्य गुप्त स्थानों में ले जाया जाता था, ताकि एयरपोर्ट पर सामान्य जांच के दौरान संदेह न हो। अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका पहले की तुलना में कहीं अधिक संगठित और जोखिमपूर्ण माना जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, भारत पहुंचने के बाद तस्करी के सोने को विभिन्न शहरों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग चैनलों का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सोना किन बाजारों तक पहुंचाया जाता था और उससे जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। फिलहाल एजेंसियां डिजिटल संचार, वित्तीय लेनदेन और यात्रा रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। हालांकि, जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सोने की लगातार बढ़ती मांग, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अंतर और आयात शुल्क जैसे आर्थिक कारणों का फायदा उठाकर तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय रहते हैं। वैध व्यापार को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ ऐसी गतिविधियां सरकार के राजस्व पर भी असर डालती हैं और संगठित अपराध को बढ़ावा दे सकती हैं। इसी वजह से सीमा शुल्क विभाग (Customs), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और अन्य एजेंसियां लगातार संयुक्त अभियान चला रही हैं।

हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में भी सोने की तस्करी के कई बड़े मामले सामने आए हैं। DRI ने अलग-अलग राज्यों में अभियान चलाकर विदेशी मूल के सोने की बड़ी खेप जब्त की है और कई लोगों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश में भी इस वर्ष कई मामलों में करोड़ों रुपये मूल्य का तस्करी का सोना बरामद किया गया है तथा जांच के दौरान बड़े नेटवर्क से जुड़े संभावित लिंक तलाशे जा रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए केवल कैरियर की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। जांच का मुख्य उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है जो पूरे नेटवर्क का संचालन करते हैं, आर्थिक लेनदेन नियंत्रित करते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी योजना बनाते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है, हालांकि यह जांच की प्रगति पर निर्भर करेगा।

विशेषज्ञों की राय:
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट पर आधुनिक स्कैनिंग तकनीक, खुफिया सूचना साझा करने की बेहतर व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और यात्रियों की प्रोफाइलिंग को और मजबूत बनाना आवश्यक है। उनका कहना है कि संगठित तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केवल सीमा पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करना भी जरूरी है।

निष्कर्ष:
दुबई-भारत गोल्ड स्मगलिंग नेटवर्क का हालिया खुलासा यह दर्शाता है कि तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अपराधी तकनीक तथा नए हथकंडों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती पहले से अधिक कठिन हो गई है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं।