इनकम टैक्स विभाग के नाम पर ₹6,000 का फर्जी नोटिस वायरल, PIB Fact Check ने बताया साइबर ठगी का तरीका



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“इनकम टैक्स के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल! ₹6,000 वाले नोटिस से रहें सावधान”

PC News | फैक्ट चेक

नई दिल्ली। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन दिनों एक ऐसा फर्जी नोटिस तेजी से प्रसारित किया जा रहा है, जिसे इनकम टैक्स विभाग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। वायरल संदेश में लोगों से कथित तौर पर ₹6,000 के टैक्स भुगतान की मांग की जा रही है। संदेश को इस तरह तैयार किया गया है कि देखने वाले को यह किसी सरकारी विभाग की आधिकारिक सूचना नजर आए।

हालांकि, इस दावे की सच्चाई सामने आने के बाद लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह नोटिस फर्जी है और लोगों को भ्रमित करके उनकी निजी या वित्तीय जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। PIB Fact Check ने भी इस तरह के दावे को फर्जी बताते हुए लोगों को ऐसे संदेशों के झांसे में नहीं आने की सलाह दी है।

क्या है वायरल मैसेज का दावा?

वायरल नोटिस में इनकम टैक्स विभाग का नाम और सरकारी संचार जैसा प्रारूप इस्तेमाल किया गया है। इसमें प्राप्तकर्ता से ₹6,000 की राशि जमा करने के लिए कहा जाता है। ऐसे संदेशों का उद्देश्य आमतौर पर लोगों को जल्दबाजी में कार्रवाई करने के लिए मजबूर करना होता है।

साइबर ठग सरकारी विभागों, बैंकों और दूसरी विश्वसनीय संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल करके ऐसे संदेश तैयार करते हैं। सरकारी भाषा, लोगो, नोटिस का प्रारूप और भुगतान से जुड़ी जानकारी जोड़कर संदेश को वास्तविक दिखाने की कोशिश की जाती है।

PIB Fact Check ने क्या बताया?

PIB Fact Check के मुताबिक ₹6,000 भुगतान से जुड़ा यह वायरल इनकम टैक्स नोटिस फर्जी और phishing scam का हिस्सा है। लोगों को ऐसे संदेशों के आधार पर कोई भुगतान नहीं करना चाहिए और न ही उनमें दिए गए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना चाहिए।

Phishing में ठग किसी भरोसेमंद संस्था या अधिकारी के नाम का इस्तेमाल करके व्यक्ति से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसमें बैंक खाते की जानकारी, कार्ड डिटेल, पासवर्ड, OTP या दूसरी व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा सकती है।

फर्जी नोटिस से कैसे बचें?

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि किसी भी संदेश को देखकर तुरंत भुगतान न करें। यदि किसी व्यक्ति को टैक्स से संबंधित कोई सूचना मिलती है तो उसे आधिकारिक सरकारी माध्यम से सत्यापित करना चाहिए।

खास तौर पर इन बातों का ध्यान रखें—

  • अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • किसी संदिग्ध वेबसाइट पर बैंक डिटेल न डालें।
  • OTP, PIN, पासवर्ड या कार्ड की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
  • सरकारी विभाग के नाम से आए संदेश को बिना सत्यापन के सही न मानें।
  • किसी नोटिस में तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया गया हो तो अतिरिक्त सावधानी बरतें।
  • टैक्स से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक आयकर विभाग के माध्यमों का इस्तेमाल करें।
  • संदिग्ध संदेश को आगे फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें।

सरकारी नाम का इस्तेमाल क्यों करते हैं साइबर ठग?

साइबर अपराधियों के लिए किसी सरकारी विभाग का नाम लोगों का भरोसा हासिल करने का आसान तरीका बन गया है। जब किसी संदेश में “Income Tax Department”, “Government of India” या किसी अन्य सरकारी संस्था का नाम दिखाई देता है तो कई लोग बिना जांच किए उसे वास्तविक मान लेते हैं।

ठग इसी भरोसे का फायदा उठाकर लोगों को भुगतान करने या किसी लिंक पर अपनी जानकारी दर्ज करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे फर्जी संदेश

सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी ई-मेल, वेबसाइट, नोटिस और सोशल मीडिया संदेशों के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। PIB Fact Check का कहना है कि वह केंद्र सरकार, उसके मंत्रालयों, विभागों और संबंधित संस्थाओं से जुड़ी संदिग्ध सूचनाओं की जांच करता है और सत्यापन के बाद गलत दावों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करता है।

PIB के अनुसार Fact Check Unit ने नवंबर 2019 में काम शुरू किया था। इसका उद्देश्य सरकार से संबंधित फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं की पहचान कर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना है।

PIB Fact Check से कैसे करें सत्यापन?

अगर किसी नागरिक को केंद्र सरकार से संबंधित कोई संदिग्ध सूचना मिलती है तो वह PIB Fact Check के माध्यम से उसकी जांच के लिए अनुरोध कर सकता है। PIB की आधिकारिक जानकारी के अनुसार Fact Check Unit के पास शिकायत या सत्यापन अनुरोध भेजने के लिए वेबसाइट और WhatsApp सुविधा उपलब्ध है।

PIB Fact Check की आधिकारिक वेबसाइट पर संदिग्ध सरकारी दावों की जांच से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।

PC News की अपील

किसी भी सरकारी विभाग के नाम से आया संदेश देखकर घबराने या तुरंत पैसे जमा करने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचना बेहद जरूरी है। डिजिटल दौर में फर्जी नोटिस और नकली वेबसाइटें वास्तविक सरकारी संचार जैसी दिखाई दे सकती हैं।

₹6,000 के कथित इनकम टैक्स नोटिस को लेकर वायरल दावा फर्जी बताया गया है। इसलिए नागरिक ऐसे संदेशों पर प्रतिक्रिया देने, भुगतान करने या निजी जानकारी साझा करने से बचें।

याद रखें—संदिग्ध लिंक पर एक क्लिक आपकी निजी और वित्तीय जानकारी को जोखिम में डाल सकता है।

फैक्ट चेक: ❌ वायरल दावा फर्जी
दावा: इनकम टैक्स विभाग ने ₹6,000 भुगतान का नोटिस भेजा
सच्चाई: PIB Fact Check के अनुसार वायरल नोटिस phishing scam से जुड़ा फर्जी संदेश है।

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