देश में EV चार्जिंग नेटवर्क 67,600 के पार
भारत में EV चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार, 52 हजार से ज्यादा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन; फास्ट चार्जिंग पर भी जोर
नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रिक कार, बाइक, स्कूटर, ऑटो और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के बीच सरकार और निजी क्षेत्र देशभर में सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं।
सरकार की ओर से जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार देश में 52,718 सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। इनमें 16,561 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन ऐसे हैं, जहां कारों के लिए फास्ट चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह विस्तार भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और EV चालकों की सबसे बड़ी चिंता मानी जाने वाली ‘रेंज एंग्जायटी’ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शहरों के साथ हाईवे पर भी बढ़ रहा चार्जिंग नेटवर्क
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए चार्जिंग सुविधा सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। यदि लंबी दूरी के रास्तों पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं हों तो वाहन मालिकों को बीच रास्ते में बैटरी खत्म होने की चिंता रहती है।
इसी चुनौती को देखते हुए सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क को शहरों के अलावा हाईवे और प्रमुख मार्गों तक विस्तार देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता और नीतिगत समर्थन उपलब्ध कराया है।
फास्ट चार्जिंग स्टेशन बढ़ने से लंबी दूरी की यात्रा आसान
कुल 52,718 सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशनों में से 16,561 फास्ट चार्जिंग सुविधा वाले स्टेशन कारों के लिए उपलब्ध बताए गए हैं। फास्ट चार्जिंग का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि सामान्य चार्जिंग की तुलना में कम समय में वाहन को पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकती है।
जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी क्षमता बढ़ रही है और ग्राहक लंबी दूरी के लिए EV का इस्तेमाल कर रहे हैं, वैसे-वैसे फास्ट चार्जिंग नेटवर्क की मांग भी बढ़ रही है।
PM E-DRIVE के तहत ₹2,000 करोड़ का प्रावधान
केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए PM E-DRIVE योजना के तहत सार्वजनिक EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया है।
सरकार का उद्देश्य देशभर में चार्जिंग नेटवर्क को बढ़ाना है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग सुविधाओं की कमी न हो। इसके अलावा FAME-II योजना के तहत भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया है।
FAME-II के तहत भी तैयार हुआ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
भारी उद्योग मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक FAME-II योजना के तहत सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹912.50 करोड़ स्वीकृत किए गए थे। इसमें से ₹895.48 करोड़ जारी किए जा चुके थे और 18 मार्च 2026 तक ₹655.43 करोड़ का उपयोग बताया गया था।
मार्च 2026 में सरकार ने संसद को बताया था कि FAME-II के तहत देशभर में 9,332 चार्जिंग स्टेशनों को मंजूरी दी गई थी, जिनमें से 6,645 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन चालू थे। यह आंकड़ा विशेष रूप से FAME-II के तहत स्वीकृत और परिचालित स्टेशनों का है, जबकि 52,718 का आंकड़ा देश के सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशनों का व्यापक आंकड़ा है।
उत्तर प्रदेश में भी बढ़ रही EV चार्जिंग की सुविधा
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उत्तर प्रदेश भी EV चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार वाले राज्यों में शामिल है। मार्च 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार FAME-II के तहत उत्तर प्रदेश के लिए 937 चार्जिंग स्टेशन स्वीकृत थे, जिनमें 456 परिचालित बताए गए थे।
लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी और आगरा जैसे बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है।
निजी कंपनियों के लिए भी खुला है रास्ता
EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना सरकार की ओर से लाइसेंस आधारित गतिविधि नहीं है, जिससे निजी कंपनियों और उद्यमियों के लिए भी इस क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता खुला है। सरकार के अनुसार निजी उद्यमी निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकते हैं।
इससे आने वाले समय में पेट्रोल पंप, मॉल, होटल, पार्किंग स्थल, हाईवे और व्यावसायिक परिसरों में निजी कंपनियों द्वारा चार्जिंग स्टेशन लगाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
2024 की नई गाइडलाइन से नेटवर्क को मिलेगा ढांचा
विद्युत मंत्रालय ने Electric Vehicle Charging Infrastructure-2024 Guidelines जारी की हैं। इनका उद्देश्य देश में ऐसा चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है जो आपस में जुड़ा हुआ और इंटरऑपरेबल हो।
इन दिशानिर्देशों में चार्जिंग स्टेशन, कनेक्टर, बिजली कनेक्शन, बैटरी स्वैपिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर मानक तय किए गए हैं। इससे अलग-अलग कंपनियों के EV उपयोगकर्ताओं के लिए चार्जिंग नेटवर्क को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ने से EV बाजार को मिलेगा फायदा
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ने के साथ चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार ऑटो इंडस्ट्री के लिए भी महत्वपूर्ण है। कार निर्माता कंपनियां लगातार नए इलेक्ट्रिक मॉडल बाजार में उतार रही हैं। दोपहिया और तीन पहिया वाहनों के क्षेत्र में भी इलेक्ट्रिक विकल्पों की संख्या बढ़ रही है।
ग्राहक EV खरीदने से पहले सिर्फ वाहन की कीमत और रेंज नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि उनके घर, कार्यालय और नियमित यात्रा वाले रास्तों पर चार्जिंग की सुविधा कितनी आसानी से उपलब्ध होगी।
ऐसे में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार EV बिक्री को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अभी भी कई चुनौतियां मौजूद
हालांकि देश में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। सभी शहरों और ग्रामीण इलाकों में चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता समान नहीं है। कई जगहों पर फास्ट चार्जर की संख्या सीमित है।
इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए जमीन, पर्याप्त बिजली कनेक्शन, ट्रांसफॉर्मर क्षमता, रखरखाव और व्यावसायिक रूप से स्टेशन को लाभदायक बनाए रखना भी बड़ी चुनौतियां हैं।
आने वाले वर्षों में EV की संख्या बढ़ने के साथ इन समस्याओं का समाधान करना भी उतना ही जरूरी होगा।
भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिलेगी नई रफ्तार
भारत सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देकर पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करना तथा स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए वाहन निर्माण के साथ-साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना जरूरी है।
52,718 सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशन और 16,561 फास्ट-चार्जिंग स्टेशन का मौजूदा आंकड़ा बताता है कि देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का आधार तेजी से तैयार हो रहा है। हालांकि, EV की बढ़ती संख्या को देखते हुए आने वाले वर्षों में इस नेटवर्क को कई गुना बढ़ाने की जरूरत होगी।
PC News की खास नजर
इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं रह गए हैं, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इस बदलाव की सबसे अहम कड़ी है। आने वाले समय में EV बिक्री, बैटरी तकनीक, फास्ट चार्जिंग, बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क ऑटो इंडस्ट्री की दिशा तय करने वाले प्रमुख क्षेत्र होंगे।
नोट: उपलब्ध सरकारी ताजा आंकड़ों के आधार पर इस खबर में 52,718 सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशनों का आंकड़ा इस्तेमाल किया गया है। ‘67,600 से ज्यादा’ वाला आंकड़ा प्रकाशित करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना जरूरी होगा।
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