अमेरिका के नए प्रतिबंधों से भड़का ईरान, होर्मुज में तेल की आवाजाही पर गहराया संकट
ईरान-अमेरिका तनाव फिर चरम पर! नई अमेरिकी पाबंदियों की तैयारी, होर्मुज में तेल कारोबार पर संकट
नई दिल्ली/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। वाशिंगटन की ओर से ईरान पर नई और कड़ी आर्थिक पाबंदियां लगाने की तैयारी की जा रही है, जबकि तेहरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव का असर अब केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल कारोबार और समुद्री परिवहन पर भी दिखाई दे रहा है।
अमेरिका की नई रणनीति से बढ़ी बेचैनी
अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने नई पाबंदियों को बेहद सख्त बताया है। रिपोर्टों के मुताबिक इन प्रतिबंधों का असर ईरान के साथ कारोबार करने वाले कुछ दूसरे देशों और कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका का दबाव केवल ईरान की अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। वाशिंगटन चाहता है कि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवाद पर अपने रुख में बदलाव के लिए मजबूर किया जाए।
ईरान ने किया पलटवार
अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा से पहले ही ईरान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नई अमेरिकी प्रतिबंध नीति को पुरानी रणनीति का दोहराव बताते हुए संकेत दिया कि तेहरान इस दबाव के सामने अपनी नीति नहीं बदलेगा।
ईरान की ओर से लगातार यह संकेत भी दिया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका प्रभाव इस संघर्ष में महत्वपूर्ण रणनीतिक हथियार है। यही कारण है कि इस समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।
होर्मुज में थमा तेल का बड़ा कारोबार
इस पूरे विवाद का सबसे गंभीर असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही में भारी कमी आई है।
रॉयटर्स के अनुसार, युद्ध से पहले इस जलमार्ग से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल का परिवहन होता था, जबकि अब यह मात्रा करीब 80 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर गई है। कुछ जहाजों को विशेष अनुमति के बाद गुजरने दिया जा रहा है, लेकिन सामान्य समुद्री यातायात अभी भी बुरी तरह प्रभावित है।
चीन पर भी बढ़ सकता है अमेरिकी दबाव
नई अमेरिकी पाबंदियों का एक बड़ा निशाना ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी बन सकते हैं। खास तौर पर चीन पर नजर है, क्योंकि वह ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है।
अमेरिका चाहता है कि चीन समेत दूसरे देश ईरान के साथ तेल और व्यापारिक गतिविधियों को लेकर अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करें। यदि नई पाबंदियों का दायरा बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
तेल की कीमतों पर भी असर
होर्मुज से तेल की आवाजाही प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हाल के दिनों में अमेरिकी दबाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है।
विशेषज्ञों की चिंता यह है कि यदि समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक संकट बना रहा तो तेल की आपूर्ति और परिवहन लागत दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।
बातचीत का रास्ता अभी भी साफ नहीं
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बावजूद स्थायी शांति वार्ता का कोई स्पष्ट रास्ता अभी सामने नहीं आया है। दोनों पक्षों की ओर से सख्त बयान जारी हो रहे हैं और एक-दूसरे पर दबाव बनाने की रणनीति जारी है।
वहीं, क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ईरान और ओमान के अधिकारियों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही और संभावित बातचीत को लेकर चर्चा हुई है। इससे संकेत मिलता है कि तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
दुनिया की नजर अब होर्मुज पर
ईरान-अमेरिका टकराव का अगला चरण कितना गंभीर होगा, यह काफी हद तक आने वाले दिनों में होने वाली अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
अगर नई पाबंदियों के बाद तेहरान और ज्यादा सख्त रुख अपनाता है और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन, वैश्विक व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की निगाहें अमेरिका की प्रस्तावित नई पाबंदियों, ईरान की संभावित प्रतिक्रिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही पर टिकी हैं। आने वाले कुछ दिन इस पूरे संकट की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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