काकोरी में फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर लूट, छात्र-छात्रा को धमकाकर मोबाइल और 14 हजार रुपये हड़पे



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आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड पर नहर किनारे हुई वारदात, बदमाशों ने पुलिस अधिकारी बताकर बनाया दबाव; काकोरी पुलिस ने केस दर्ज कर शुरू की जांच

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र में खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर छात्र-छात्रा से लूटपाट किए जाने का मामला सामने आया है। बाइक सवार दो युवकों ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी होने का झांसा देकर पहले दोनों को डराया-धमकाया और फिर उनके मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए। आरोप है कि बदमाशों ने छात्र पर दबाव बनाकर उसके मोबाइल से यूपीआई के जरिए 14 हजार रुपये भी अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। घटना के बाद पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड पर बनाया निशाना

मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना काकोरी क्षेत्र में आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड के पास कठिंगरा गांव के नजदीक हुई। बताया गया कि छात्र और छात्रा बाइक से घूमने निकले थे और शाम के समय नहर के किनारे कुछ देर के लिए रुके थे।

इसी दौरान बाइक सवार दो युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि दोनों युवकों ने खुद को क्राइम ब्रांच से जुड़ा अधिकारी बताया और छात्र-छात्रा से पूछताछ शुरू कर दी। बदमाशों ने उन पर आपत्तिजनक गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई और मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।

अचानक पुलिस अधिकारी बनकर पूछताछ किए जाने से दोनों घबरा गए। आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर बदमाशों ने उनसे मोबाइल फोन छीन लिए।

धमकी देकर मोबाइल का पासकोड भी पूछा

पीड़ितों के मुताबिक, बदमाशों ने केवल मोबाइल ही नहीं छीने, बल्कि छात्र को धमकाकर फोन का लॉक और यूपीआई से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर ली। इसके बाद आरोपी उसे एक डिजिटल भुगतान करने के लिए मजबूर करने लगे।

डर के कारण छात्र ने बताए गए तरीके से भुगतान कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, बदमाशों ने करीब 14 हजार रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। शिकायत में यह भी बताया गया कि भुगतान के दौरान जिस स्कैनर का इस्तेमाल किया गया, उस पर एक व्यक्ति का नाम दिखाई दिया था।

विरोध करने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप

पीड़ित छात्र-छात्रा ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि जब उन्होंने बदमाशों की बात मानने से इनकार किया तो उनके साथ मारपीट की गई और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

आरोपियों ने कथित तौर पर अपने आपको पुलिस का कर्मचारी बताकर ऐसा दबाव बनाया कि दोनों पीड़ित काफी डर गए। इसी भय के चलते उन्होंने अपने मोबाइल और आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जानकारी आरोपियों को दे दी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोग वास्तविक पुलिसकर्मी और फर्जी पुलिस अधिकारी के बीच अंतर कैसे पहचानें, खासकर जब अचानक कोई व्यक्ति रास्ते में रोककर कार्रवाई की धमकी देने लगे।

घर पहुंचने के बाद पुलिस से की शिकायत

घटना के बाद मोबाइल फोन आरोपियों के पास चले जाने के कारण पीड़ित तत्काल पुलिस से संपर्क नहीं कर सके। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र पहले अपने घर पहुंचा और इसके बाद पुलिस चौकी तथा काकोरी कोतवाली में जाकर शिकायत दर्ज कराई।

पीड़ित की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब आरोपियों की पहचान करने के लिए उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों की जांच कर रही है।

CCTV फुटेज और डिजिटल ट्रांजैक्शन से खुलेगा राज

पुलिस जांच में CCTV फुटेज और डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन को महत्वपूर्ण सुराग माना जा रहा है। जिस इलाके में घटना हुई, वहां आसपास मौजूद कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी किस बाइक से पहुंचे थे और घटना के बाद किस दिशा में फरार हुए।

इसके अलावा 14 हजार रुपये के डिजिटल लेनदेन से भी पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। जिस खाते या यूपीआई माध्यम में रकम गई, उसकी जानकारी के आधार पर पुलिस संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खाते या डिजिटल भुगतान माध्यम पहले से किसी अन्य मामले से जुड़े हैं या नहीं।

फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर अपराध करने का बढ़ता खतरा

इस घटना ने पुलिस की पहचान का गलत इस्तेमाल कर अपराध करने वाले लोगों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अपराधी कई बार पुलिस या किसी जांच एजेंसी का नाम लेकर आम लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।

पुलिस का नाम सुनते ही आम नागरिक घबरा सकता है और इसी डर का फायदा उठाकर अपराधी पैसे, मोबाइल या अन्य सामान अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर सकते हैं।

ऐसे मामलों में नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि वास्तविक पुलिस कार्रवाई की अपनी कानूनी प्रक्रिया होती है। केवल किसी व्यक्ति के खुद को पुलिस अधिकारी बताने से उसकी पहचान वास्तविक नहीं मानी जा सकती।

पुलिस पहचान को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर अचानक रोकता है और पैसे या मोबाइल देने का दबाव बनाता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।

यदि स्थिति संदिग्ध लगे तो व्यक्ति सुरक्षित स्थान पर जाकर स्थानीय पुलिस से संपर्क कर सकता है। डिजिटल भुगतान के मामले में भी किसी अज्ञात व्यक्ति के दबाव में यूपीआई पिन, OTP या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

पुलिस के सामने आरोपियों को पकड़ने की चुनौती

काकोरी पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की है। इसके लिए घटनास्थल के आसपास के CCTV कैमरों, मोबाइल और डिजिटल लेनदेन से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध जानकारी को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि क्या दोनों आरोपी पहले से किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल रहे हैं या इस तरह की घटनाओं को किसी गिरोह के साथ मिलकर अंजाम दिया जा रहा है।

जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल मामले में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की जांच जारी है। शुरुआती जानकारी के आधार पर घटना में दो बाइक सवार युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है।

पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों ने इस वारदात को अकेले अंजाम दिया था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

घटना ने यह भी दिखाया है कि अपराधी अब लोगों को डराने के लिए पुलिस और क्राइम ब्रांच जैसी एजेंसियों की पहचान का सहारा लेने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को सतर्क रहने के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधि की तत्काल पुलिस को सूचना देने की जरूरत है।

PC NEWS की अपील

अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए और पैसे या निजी जानकारी देने का दबाव बनाए, तो बिना पुष्टि किए उसकी बात पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर पुलिस की मदद लेना बेहतर है।