संसद का मानसून सत्र हंगामे के बीच खत्म, कम कामकाज को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने



Spread the love

“मानसून सत्र का हंगामेदार क्लाइमेक्स, कम कामकाज पर सरकार-विपक्ष में वार-पलटवार”

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार, 13 अगस्त को हंगामे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस बार का सत्र करीब 25 दिनों तक चला और इसमें कुल 19 बैठकें हुईं। सरकार की ओर से कई विधायी काम पूरे किए गए, लेकिन लगातार विरोध-प्रदर्शन और व्यवधान के कारण संसद की कार्यवाही का बड़ा हिस्सा प्रभावित रहा।

19 बैठकों वाला रहा मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक निर्धारित था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान दोनों सदनों में कुल 19 बैठकें हुईं। सत्र के दौरान लोकसभा में 11 विधेयक पेश किए गए, जबकि राज्यसभा में 2 विधेयक पेश किए गए। दोनों सदनों से कुल 12 विधेयक पारित होने की जानकारी सरकार ने दी है।हालांकि, विधायी कामकाज के साथ-साथ इस पूरे सत्र में राजनीतिक टकराव भी लगातार देखने को मिला। कई मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

कम उत्पादकता बनी बड़ा मुद्दा

मानसून सत्र के अंतिम दिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदनों की उत्पादकता को लेकर आंकड़े पेश किए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 प्रतिशत, जबकि राज्यसभा की उत्पादकता लगभग 39 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि विरोध और हंगामे का असर संसद के निर्धारित कामकाज पर काफी पड़ा।

सरकार की ओर से विपक्ष पर बार-बार कार्यवाही रोकने का आरोप लगाया गया। दूसरी तरफ विपक्ष का कहना रहा कि महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए और उन्हें सदन में पर्याप्त चर्चा का अवसर मिलना चाहिए।

NEET और छात्रों के मुद्दे पर भी टकराव

सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक बहस का केंद्र रहे। NEET और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर विपक्ष ने सरकार से चर्चा और जवाब की मांग की। सरकार की ओर से भी छात्रों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई।

12 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की इच्छा जताई थी। इसके बावजूद सदन में राजनीतिक गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका।

FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया

मानसून सत्र के अंतिम दिनों में Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 भी चर्चा में रहा। लोकसभा ने इस विधेयक को विस्तृत जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का फैसला किया।

इस विधेयक का संबंध विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों से जुड़े नियमों और ऐसे संगठनों के FCRA प्रमाणपत्र समाप्त होने की स्थिति में विदेशी योगदान तथा संपत्तियों के प्रबंधन से है। विधेयक में इस तरह की परिस्थितियों के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

विधेयक को JPC भेजे जाने के दौरान विपक्ष की ओर से विरोध भी देखने को मिला। सरकार का तर्क है कि विधेयक का उद्देश्य विदेशी योगदान से संबंधित व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

कई विधेयक पारित, लेकिन चर्चा पर सवाल

सरकार के मुताबिक सत्र के दौरान 12 विधेयक दोनों सदनों से पारित हुए। हालांकि, कम उत्पादकता और कुछ विधेयकों के सीमित चर्चा के बीच पारित होने को लेकर भी सवाल उठे। विपक्ष ने संसद में पर्याप्त बहस और चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।

संसदीय कामकाज को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की अपनी-अपनी दलीलें हैं। सरकार का कहना है कि व्यवधान के बावजूद महत्वपूर्ण विधायी काम किए गए, जबकि विपक्ष का आरोप है कि कई अहम विषयों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी।

अंतिम दिन भी दिखा राजनीतिक माहौल

सत्र के अंतिम दिन भी सदन का माहौल पूरी तरह शांत नहीं रहा। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही समाप्त होने के साथ ही 2026 का मानसून सत्र इतिहास का हिस्सा बन गया। सरकार ने सत्र के दौरान हुए विधायी काम को उपलब्धि के रूप में पेश किया, जबकि विपक्ष ने कम चर्चा और बार-बार हुए व्यवधान को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

इस पूरे सत्र ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि संसद में कानून बनाने के साथ-साथ व्यापक और सार्थक चर्चा के लिए कितना समय मिल पा रहा है।

PC News निष्कर्ष

संसद का मानसून सत्र विधायी गतिविधियों और राजनीतिक टकराव, दोनों के लिए चर्चा में रहा। 19 बैठकों के दौरान कई विधेयक पारित हुए, लेकिन कम उत्पादकता और लगातार व्यवधान ने संसदीय कामकाज की प्रभावशीलता पर बहस को भी तेज कर दिया। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और विपक्ष आगामी सत्रों में सदन की कार्यवाही को अधिक सुचारु बनाने के लिए किस तरह का रास्ता अपनाते हैं।

PC NEWS | सत्ता से सवाल, जनता के साथ