मुजफ्फरपुर में 15 हजार रुपये रिश्वत लेते दारोगा गिरफ्तार, केस डायरी में मदद का आरोप



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निगरानी विभाग की टीम ने सदर थाना के सब-इंस्पेक्टर भास्कर कुमार मिश्रा को कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने कार्रवाई करते हुए सदर थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर भास्कर कुमार मिश्रा को कथित तौर पर 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई फरवरी 2026 में की गई थी। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अधिकारी पर एक मामले की केस डायरी में मदद करने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की जांच की और इसके बाद ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक, मामला एक छात्र के अपहरण से जुड़े केस से संबंधित था। इस मामले में एक आरोपी जेल में बंद था और उसके भाई से दारोगा द्वारा केस डायरी में मदद पहुंचाने के नाम पर कथित तौर पर पैसे मांगे गए थे। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय इसकी सूचना निगरानी विभाग को दी। इसके बाद विभाग ने शिकायत की प्रारंभिक जांच की और आरोपों की पुष्टि के बाद कार्रवाई की योजना बनाई।

केस डायरी में मदद के नाम पर मांगी रकम

बताया गया कि संबंधित मामले में पुलिस कार्रवाई और केस डायरी से जुड़े काम में मदद करने के नाम पर दारोगा ने कथित रूप से पैसे की मांग की। शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारी के बीच बातचीत के बाद 15 हजार रुपये की रकम पर बात तय होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद निगरानी टीम ने रिश्वत की रकम के साथ आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

निगरानी विभाग की टीम ने तय योजना के तहत कार्रवाई की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जैसे ही दारोगा ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम स्वीकार की, निगरानी टीम ने उसे पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अधिकारी ने टीम का विरोध भी किया, लेकिन निगरानी अधिकारियों और जवानों ने उसे काबू में कर लिया।

थाने के बाहर हुई गिरफ्तारी

रिपोर्टों में बताया गया है कि दारोगा की गिरफ्तारी पुराने सदर थाना परिसर के बाहर सुबह के समय हुई। निगरानी टीम पहले से कार्रवाई के लिए तैयार थी। रिश्वत की रकम स्वीकार किए जाने के बाद टीम ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए आरोपी पुलिस अधिकारी को हिरासत में लिया।

इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई। पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आम नागरिक किसी भी मामले में पुलिस से निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की उम्मीद करता है।

निगरानी विभाग की कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर सवाल

मुजफ्फरपुर की इस घटना ने सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस थाने में किसी मामले की जांच के दौरान केस डायरी बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। ऐसे में केस डायरी में किसी तरह की मदद, बदलाव या राहत दिलाने के नाम पर पैसे मांगने का आरोप गंभीर प्रकृति का है।

हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं है कि आरोपी कानूनी रूप से दोषी साबित हो चुका है। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

बिहार में रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई जारी

बिहार में निगरानी विभाग समय-समय पर रिश्वत मांगने की शिकायतों पर ट्रैप कार्रवाई करता रहा है। मुजफ्फरपुर में दारोगा की गिरफ्तारी भी इसी तरह की कार्रवाई का हिस्सा थी। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर रोक लगाना और रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है।

मुजफ्फरपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि पुलिस विभाग के अंदर भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की निगरानी कितनी प्रभावी है। आम लोगों को यदि किसी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का सामना करना पड़े तो उन्हें बिना खुद कोई गैरकानूनी कदम उठाए संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के समक्ष शिकायत करनी चाहिए।

पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही जरूरी

पुलिस किसी भी आपराधिक मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में जांच से जुड़े अधिकारियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। रिश्वत के आरोपों से न केवल संबंधित अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम लोगों के बीच पुलिस व्यवस्था को लेकर भरोसे पर भी असर पड़ सकता है।

मुजफ्फरपुर का यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, किसी अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होनी चाहिए।

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