प्रकाश राज की वोटर ID पर घमासान! SIR में नाम ‘Shifted’ होने पर चुनाव आयोग से भिड़े अभिनेता



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प्रकाश राज की वोटर ID पर नया विवाद, SIR को लेकर चुनाव आयोग से भिड़े अभिनेता

बेंगलुरु: दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनकी फिल्म या अभिनय से नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट में उनके नाम और Special Intensive Revision (SIR) को लेकर है। कर्नाटक में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा के दौरान प्रकाश राज के नाम की स्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अभिनेता ने इसे नागरिक के मतदान अधिकार और सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

वोटर लिस्ट में नाम को लेकर प्रकाश राज का दावा

प्रकाश राज ने 11 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि कर्नाटक की SIR प्रक्रिया के दौरान उनका नाम बेंगलुरु की मतदाता सूची में नहीं दिख रहा था। उन्होंने कहा कि वह शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उनका कहना था कि उनका जन्म इसी क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की और अपने जीवन का बड़ा हिस्सा यहां बिताया है। इतना ही नहीं, वह 2019 के लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल सीट से उम्मीदवार भी रह चुके हैं।

अभिनेता ने अपने वीडियो में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं का भी जिक्र किया, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग कारणों से जांच के दायरे में आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लंबे समय से एक क्षेत्र में रहने वाले नागरिक के मतदाता रिकॉर्ड को लेकर इस तरह की स्थिति बन सकती है, तो आम मतदाता के सामने क्या मुश्किलें आ सकती हैं।

चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा?

प्रकाश राज के आरोपों के बाद चुनाव अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की ओर से अलग तस्वीर सामने रखी गई। अधिकारियों के अनुसार, उनका नाम पूरी तरह से मतदाता सूची से “डिलीट” नहीं किया गया, बल्कि रिकॉर्ड में उन्हें “Shifted” यानी पते से स्थानांतरित बताया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित बूथ लेवल अधिकारी ने उनके पुराने पते की जांच की थी। रिपोर्टों में कहा गया कि पड़ोसियों, संपत्ति प्रबंधक और मकान मालिक से जानकारी लेने के बाद यह निष्कर्ष दर्ज किया गया कि प्रकाश राज पिछले कुछ वर्षों से उस पते पर नहीं रह रहे थे। इसके बाद मौके की जांच से संबंधित रिपोर्ट तैयार की गई और रिकॉर्ड में उनका स्टेटस “Shifted” किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रकाश राज अब किसी दूसरे पते पर रह रहे हैं तो वह मौजूदा निवास स्थान से मतदाता पंजीकरण के लिए Form 6 के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

“Permanently Shifted” शब्द पर भड़के प्रकाश राज

विवाद उस समय और बढ़ गया जब प्रकाश राज ने चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि शुरुआत में उनके रिकॉर्ड को “permanently shifted” बताया गया था और बाद में वेबसाइट पर स्थिति बदलकर केवल “shifted” कर दी गई।

प्रकाश राज ने चुनाव आयोग से सवाल करते हुए कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम पुराने पते से हटाकर उसे स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया जाता है, तो व्यवहारिक रूप से उसे नए पते पर दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। उन्होंने अधिकारियों की ओर से दी गई अलग-अलग जानकारी को लेकर नाराजगी जताई और इसे नागरिक के सम्मान से जोड़ दिया।

चुनाव आयोग और अभिनेता के बीच बढ़ी तकरार

13 अगस्त को प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर एक और वीडियो के जरिए चुनाव अधिकारियों से कई सवाल पूछे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मामला सार्वजनिक किया तो अधिकारियों की ओर से उनसे संपर्क किया गया और रिकॉर्ड में गलती सुधारने की बात कही गई। इसके बाद उनके अनुसार आधिकारिक स्पष्टीकरण में अलग शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

प्रकाश राज ने इसी बदलाव को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि मुद्दा केवल उनकी व्यक्तिगत वोटर ID का नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि एक आम नागरिक के चुनावी अधिकार और उसके रिकॉर्ड के साथ कितनी पारदर्शिता बरती जा रही है।

SIR क्या है और क्यों हो रहा है विवाद?

कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अपडेट करना है। इस प्रक्रिया में ऐसे नामों की पहचान की जा रही है जिनके संबंध में मतदाता के अनुपस्थित होने, स्थानांतरित होने, मृत्यु, दोहरी प्रविष्टि या अन्य कारणों से सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।

प्रकाश राज का मामला ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की समीक्षा चल रही है। इसलिए उनके मामले ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है।

असली सवाल क्या है?

इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। प्रकाश राज का कहना है कि उनके मतदान अधिकार से जुड़ा रिकॉर्ड हटाए जाने की स्थिति पैदा हुई और उन्हें पहले “permanently shifted” बताया गया। वहीं चुनाव अधिकारियों का कहना है कि उनका नाम मनमाने तरीके से डिलीट नहीं किया गया, बल्कि पुराने पते से स्थानांतरित होने के आधार पर रिकॉर्ड अपडेट किया गया।

इसलिए फिलहाल इसे सीधे तौर पर “वोटर ID चोरी” या “जानबूझकर वोट काटने” का मामला कहना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे दर्ज हैं और विवाद मुख्य रूप से रिकॉर्ड की स्थिति, प्रक्रिया और अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी को लेकर है।

प्रकाश राज के लिए यह सिर्फ व्यक्तिगत मामला नहीं

प्रकाश राज लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने इसे केवल अपने वोटर रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रखा। उनका तर्क है कि अगर किसी नागरिक को अपने मतदान अधिकार से संबंधित जानकारी के लिए बार-बार सवाल उठाने पड़ें, तो इससे चुनावी प्रक्रिया में आम लोगों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।

वहीं प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना चुनावी प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है तथा स्थान बदलने वाले मतदाताओं को नए पते पर अपना पंजीकरण अपडेट कराना चाहिए।

विवाद का अगला पड़ाव क्या होगा?

फिलहाल प्रकाश राज और चुनाव अधिकारियों के बयानों के बीच मतदाता रिकॉर्ड की स्थिति को लेकर मतभेद बना हुआ है। आने वाले समय में संबंधित चुनावी रिकॉर्ड और आधिकारिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि उनके नाम की वर्तमान स्थिति क्या है और उसे किस आधार पर बदला गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि मतदाता सूची में किसी नागरिक के नाम या पते में बदलाव होने पर उसे समय रहते स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी कैसे दी जाए।

निष्कर्ष

प्रकाश राज की वोटर ID का विवाद अब केवल एक अभिनेता के मतदाता रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह गया है। SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची में नामों की समीक्षा और नागरिकों के मतदान अधिकार को लेकर यह मामला व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है।

प्रकाश राज अपने रिकॉर्ड को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं, जबकि चुनाव अधिकारी इसे पते में बदलाव के आधार पर की गई प्रक्रिया बता रहे हैं। ऐसे में अंतिम स्थिति आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड और आगे होने वाली कार्रवाई से ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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