दशकों का इंतजार खत्म! किशाऊ परियोजना पर आज 6 राज्यों की मुहर, यूपी समेत कई राज्यों को होगा फायदा”
6 राज्यों के बीच आज होगा बड़ा समझौता! किशाऊ परियोजना से बदलेगा पानी और बिजली का गणित
अमित शाह की मौजूदगी में होगा MoU, यूपी समेत 6 राज्यों को मिलेगा फायदा; करीब ₹15 हजार करोड़ की परियोजना पर दशकों बाद बनी सहमति
नई दिल्ली। उत्तर भारत में पानी और बिजली से जुड़ी जरूरतों के लिहाज से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं।
नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में होने वाले कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच परियोजना को लेकर सहमति को औपचारिक रूप दिया जाएगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल समेत संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
क्यों खास है किशाऊ परियोजना?
किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है।
करीब 660 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना से बिजली उत्पादन के साथ-साथ जल भंडारण, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति में भी मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना की जल भंडारण क्षमता करीब 1,324 मिलियन घन मीटर बताई गई है।
यूपी के लिए क्या है खास?
किशाऊ परियोजना के लाभार्थी राज्यों में उत्तर प्रदेश भी शामिल है। प्रस्तावित जल वितरण व्यवस्था के अनुसार यूपी को लगभग 543.2 क्यूसेक पानी मिलने का प्रावधान बताया गया है।
इसके अलावा परियोजना से सिंचाई और जल उपलब्धता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यानी आने वाले समय में यह समझौता उत्तर प्रदेश के लिए भी जल संसाधन के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
6 राज्यों के बीच कैसे बंटेगा पानी?
प्रस्तावित व्यवस्था में हरियाणा को करीब 836 क्यूसेक, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलने की बात सामने आई है।
वहीं हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी के उपयोग को लेकर भी नई व्यवस्था बनाई गई है। दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। इस फॉर्मूले का उद्देश्य राज्यों के बीच पानी और बिजली से जुड़े हितों का संतुलन बनाना है।
660 MW बिजली भी होगी तैयार
किशाऊ परियोजना से लगभग 660 मेगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन की क्षमता विकसित होगी। अनुमान के मुताबिक सालाना करीब 1,379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है।
इससे जल संसाधन के साथ-साथ उत्तर भारत में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यमुना को भी मिलेगा फायदा
किशाऊ परियोजना को सिर्फ पानी और बिजली की परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। टोंस नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करने और आगे यमुना में जल उपलब्धता बनाए रखने से यमुना के प्रवाह और जल प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है।
मानसून के दौरान बाढ़ नियंत्रण और गर्मियों में नदी के प्रवाह को बनाए रखने में परियोजना की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
करीब छह दशक से इंतजार
किशाऊ परियोजना का प्रस्ताव कोई नया नहीं है। इसे लेकर करीब छह दशक से चर्चा और प्रक्रिया चलती रही है। जमीन, तकनीकी पहलुओं, परियोजना लागत, जल बंटवारे और राज्यों की वित्तीय भागीदारी जैसे मुद्दों के कारण यह परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।
अब छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। आज होने वाला MoU इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
PC NEWS का सवाल
पानी और बिजली पर दशकों से चली आ रही खींचतान के बाद अगर किशाऊ परियोजना जमीन पर उतरती है, तो इसका सबसे बड़ा असर उत्तर भारत के जल प्रबंधन पर दिखाई दे सकता है।
अब सवाल सिर्फ समझौते का नहीं, बल्कि यह है कि किशाऊ परियोजना कब तक जमीन पर उतरती है और इससे राज्यों की जनता को वास्तविक लाभ कब मिलना शुरू होता है?
PC NEWS — सत्ता से सवाल, जनता के साथ





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