“KGMU में बढ़ा कर्मचारियों का आक्रोश! ESMA लागू, फिर भी प्रदर्शन पर अड़े कर्मचारी—अब आगे क्या?” english me bana do
KGMU में कर्मचारियों का प्रदर्शन, मांगों को लेकर बढ़ा विवाद! ESMA लागू होने के बाद भी आंदोलन पर अड़े कर्मचारी
लखनऊ में KGMU कर्मचारी परिषद का विरोध प्रदर्शन, प्रशासन के आदेश से टकराव की स्थिति; जानिए पूरा मामला और कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कर्मचारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। कर्मचारी परिषद ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 15 सितंबर को आंदोलन और प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने हड़ताल पर रोक लगाने के लिए ESMA के तहत छह महीने का आदेश जारी कर दिया, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
कर्मचारी परिषद का आरोप है कि कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों और उनकी मांगों पर पर्याप्त सुनवाई नहीं हो रही है। परिषद ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही है। दूसरी ओर KGMU प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े बड़ी संख्या में मामलों का पहले ही निस्तारण किया जा चुका है।
ESMA लागू होने से बढ़ा तनाव
कर्मचारियों के प्रस्तावित आंदोलन से ठीक पहले KGMU की कुलसचिव अर्चना गहरवार ने ESMA के तहत आदेश जारी करते हुए छह महीने तक हड़ताल पर रोक लगा दी। आदेश में इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
हालांकि, कर्मचारी परिषद के महामंत्री अनिल कुमार ने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया। उनका कहना है कि कर्मचारी अपने अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।
यानी फिलहाल KGMU में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन की ओर से हड़ताल पर रोक और कर्मचारियों के आंदोलन के ऐलान के बीच आगे की स्थिति क्या होगी?
कर्मचारियों की नाराजगी की वजह क्या है?
कर्मचारी परिषद की ओर से प्रशासन के कामकाज और कर्मचारियों से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परिषद का कहना है कि कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और कर्मचारियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
वहीं, KGMU प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने स्तर पर किए गए कामों का आंकड़ा सामने रखा है।
कुलसचिव के मुताबिक, उनके कार्यभार संभालने के बाद कर्मचारियों से जुड़े 2,461 सेवा संबंधी मामलों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 485 कर्मचारियों को पदोन्नति, 423 कर्मचारियों के ACP मामलों का निस्तारण, 495 GPF लोन मामलों का समाधान, 908 मामलों में वेतन निर्धारण और 150 कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ दिए जाने की जानकारी दी गई है।
कर्मचारी परिषद को लेकर भी सवाल
KGMU प्रशासन ने कर्मचारी परिषद की मौजूदा स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कुलसचिव के अनुसार कर्मचारी परिषद वर्ष 2024 में ही भंग हो चुकी थी और परिषद की ओर से पत्रावली जारी करने पर भी रोक है।
इसके बावजूद कर्मचारी परिषद की ओर से पत्र जारी किए जाने और आंदोलन किए जाने को लेकर प्रशासन ने आपत्ति जताई है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी शासन स्तर पर भी दी जाएगी।
कर्मचारी परिषद का क्या कहना है?
दूसरी तरफ कर्मचारी परिषद के महामंत्री अनिल कुमार ने प्रशासन के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है और इसी कारण कर्मचारियों में नाराजगी है।
उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए भर्ती संबंधी आरोपों को भी गलत बताया और किसी भी जांच का सामना करने की बात कही। कर्मचारी पक्ष का कहना है कि वह अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
मरीजों पर क्या पड़ सकता है असर?
KGMU उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारियों का बड़े स्तर पर काम से अलग होना स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकता है।
यही वजह है कि प्रशासन की ओर से हड़ताल पर रोक को गंभीरता से लिया गया है। अस्पताल जैसी आवश्यक सेवा में कामकाज प्रभावित होने की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और उनके तीमारदारों को हो सकती है।
हालांकि, आज के प्रदर्शन से अस्पताल की कौन-कौन सी सेवाएं प्रभावित हुईं और मरीजों पर वास्तविक असर कितना पड़ा, इस संबंध में स्थिति लगातार अपडेट हो रही है। इसलिए किसी सेवा के पूरी तरह बंद होने का दावा आधिकारिक पुष्टि के बिना करना उचित नहीं होगा।
KGMU में पहले भी सामने आ चुके हैं कर्मचारी विवाद
KGMU में कर्मचारियों के आंदोलन का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले भी वेतन, आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा शर्तों और अन्य मांगों को लेकर विरोध सामने आ चुका है। ऐसे आंदोलनों में कर्मचारियों की मांगों और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन सबसे बड़ी चुनौती बनता है।
अब मौजूदा विवाद में एक तरफ कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रशासन ने ESMA के जरिए हड़ताल पर रोक लगा दी है।
अब आगे क्या?
फिलहाल KGMU विवाद में तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण हैं—
पहला: कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर किस स्तर तक आंदोलन जारी रखते हैं।
दूसरा: ESMA के आदेश के बाद प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है।
तीसरा: दोनों पक्षों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या विवाद और बढ़ता है।
KGMU जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में किसी भी तरह का लंबा गतिरोध सीधे मरीजों की सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान और अस्पताल की सेवाओं का सुचारु संचालन—दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा।
PC NEWS का सवाल
कर्मचारियों की मांगें अगर जायज हैं तो उनका समाधान बातचीत की मेज पर क्यों नहीं? और अगर प्रशासन ने हजारों मामलों का निस्तारण किया है, तो कर्मचारियों की नाराजगी आखिर बनी क्यों हुई है?
इस विवाद का समाधान केवल आदेश या आंदोलन से नहीं, बल्कि पारदर्शी बातचीत और स्पष्ट जवाबदेही से निकलना चाहिए।
PC NEWS — सत्ता से सवाल, जनता के साथ





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