“मिडिल ईस्ट में फिर मचा हड़कंप! हूतियों का सऊदी पर मिसाइल-ड्रोन हमला, 13 घायल”
मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव! हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब पर मिसाइल-ड्रोन हमला, 13 नागरिक घायल
तीन सऊदी शहरों को बनाया गया निशाना, कई घर और वाहन क्षतिग्रस्त; खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी चिंता
रियाद/दुबई। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यमन के हूती संगठन ने सऊदी अरब के खिलाफ एक नया बड़ा हमला किया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से किए गए हमलों में 13 नागरिक घायल हुए हैं। हमले में कई रिहायशी मकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है।
ताजा घटनाक्रम ने पहले से तनावपूर्ण खाड़ी क्षेत्र की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। खास चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि यमन में लड़ाई तेज होने के साथ-साथ लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े ऊर्जा एवं समुद्री मार्गों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
तीन शहरों में मिसाइल और ड्रोन हमले
सऊदी अधिकारियों के अनुसार हूती हमलों में खामिस मुशैत, अबहा और ताइफ को निशाना बनाया गया। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के मुताबिक, हमलों में 13 नागरिकों को मामूली से मध्यम स्तर की चोटें आई हैं। इसके अलावा सात घर और दो वाहन क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।
हमलों के बाद सऊदी अधिकारियों ने कई इलाकों में सुरक्षा चेतावनियां जारी कीं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
हूतियों ने सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाने का दावा किया
हूती सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि संगठन ने दक्षिणी सऊदी अरब स्थित खामिस मुशैत के किंग खालिद एयर बेस पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया।
हूती पक्ष का कहना है कि हमले में सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। उसने इसे यमन में सऊदी हवाई हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। हालांकि, हमले से संबंधित अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में तत्काल संभव नहीं है।
सऊदी अरब ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
हमले के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने संकेत दिया है कि हूती हमलों का जवाब दिया जाएगा। सऊदी पक्ष ने इन हमलों को नागरिकों और नागरिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा बताया है।
इस घटनाक्रम के बाद आने वाले दिनों में यमन और सऊदी सीमा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
यमन में भी तेज हो रही है लड़ाई
सिर्फ सऊदी अरब पर हमले ही चिंता का कारण नहीं हैं। यमन के भीतर भी हाल के दिनों में संघर्ष काफी बढ़ गया है।
हूती लड़ाकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार से जुड़े बलों के बीच लाल सागर के आसपास कई इलाकों में लड़ाई तेज हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक हूतियों ने हाल के दिनों में पश्चिमी तट के कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की है। पेरिम द्वीप पर नियंत्रण भी क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
तेल की कीमतों पर पड़ सकता है असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ता सैन्य तनाव सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल है। हालिया घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन भी परिचालन संबंधी संकट से प्रभावित हुई है। यह पाइपलाइन फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल को लाल सागर की दिशा में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है।
Reuters के अनुसार, सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से ज्यादा की शुरुआती तेजी देखी गई, हालांकि बाद में बढ़त कुछ कम हुई।
भारत पर भी नजर क्यों?
मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक तनाव रहने का असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है।
अगर क्षेत्र में तेल की सप्लाई बाधित होती है और अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत, महंगाई और उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
यानी यमन और सऊदी अरब के बीच बढ़ता संघर्ष केवल क्षेत्रीय सैन्य विवाद नहीं रह जाता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण ऊर्जा कॉरिडोर है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है।
ईरान और खाड़ी देशों के बीच हॉर्मुज को लेकर प्रस्तावित बातचीत भी फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी है। इससे क्षेत्र में तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों को झटका लगा है।
अमेरिका की भूमिका पर भी नजर
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की मांग की है, लेकिन वॉशिंगटन फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप के बजाय खुफिया सहायता तक सीमित रहने की कोशिश कर रहा है।
अगर अमेरिका सीधे संघर्ष में उतरता है तो मौजूदा संकट का दायरा और बड़ा हो सकता है।
क्या मिडिल ईस्ट में बड़ा युद्ध छिड़ सकता है?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हालिया घटनाक्रम किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा। लेकिन स्थिति निश्चित रूप से बेहद संवेदनशील है।
एक तरफ यमन में हूती और सरकार समर्थित बलों के बीच लड़ाई तेज है, दूसरी तरफ सऊदी अरब पर लगातार हमलों का खतरा बना हुआ है। इसके साथ लाल सागर, तेल प्रतिष्ठानों और हॉर्मुज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तनाव वैश्विक चिंता बढ़ा रहा है।
अगर हमले और जवाबी सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है, तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
PC NEWS का सवाल
क्या मिडिल ईस्ट एक और बड़े संघर्ष की तरफ बढ़ रहा है?
13 नागरिकों के घायल होने से लेकर तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों पर बढ़ते दबाव तक—मौजूदा घटनाक्रम कई स्तरों पर चिंता पैदा कर रहा है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि सऊदी अरब की अगली सैन्य प्रतिक्रिया क्या होगी और क्या कूटनीति के जरिए तनाव को और बढ़ने से रोका जा सकेगा।
PC NEWS — सत्ता से सवाल, जनता के साथ





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